When Kathmandu was buzzing with life!

दरबार स्क्वायर पर जैसे जादुई संसार फैला था। यहां से वहां तक मंदिरों की भीड़ थी और अचरज की बात थी कि ज्यादातर मंदिर बंद थे। साल में सिर्फ एक रोज़ किसी खास अवसर पर खुलने वाले उन मंदिरों के बंद दरवाज़ों को देखकर लौटा लाए कदम।

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Hobnobbing with the tribals of Bastar*

जगदलपुर में लोहांडीगुड़ा के इस हाट बाज़ार में ख्वाहिशों के कैसे-कैसे रंग देखे। हाट बाज़ार में अपने खेतों की उपज बेचने 50- 60 किलोमीटर दूर-दूर के देहातों से चले आते …

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Meghalaya – playground of Rain God

जहां बादल बिछुड़े हुए प्रेमियों की तरह आंसू बहा रहे हैं बेशक, दिल्ली समेत उत्तर भारत के ज्यादातर भागों में मानसूनी फुहारों की लुकाछिपी ने निराशा पैदा की है, लेकिन …

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