What to pack for winter in ladakh

लद्दाख में सर्दी का रुख करने का इरादा है?

जानिए कैसी तैयारियां जरूरी हैं ‘लद्दाख इन विंटर’ के लिए

सर्दी और पहाड़ से मेरा नाता अब कम से कम खुद मुझे तो ज़रा नहीं चौंकाता। लेकिन सर्दी अगर माइनस बीस-तीस वाली हो और पहाड़ी मंज़र दस हज़ार फीट से ज्‍यादा की ऊंचाई पर हो तो यकीनन, एक खास तैयारी जरूरी होती है। तो आज मैं आपको बताऊंगी कि अगर दिसंबर से मार्च के दरम्‍यान दुनिया की छत कहे जाने वाले लद्दाख का रुख करना हो तो सूटकेस में क्‍या पैक करें।

लेह से करगिल के रास्‍ते में पड़ने वाले सबसे ऊंचे दर्रे पर सर्दी का आलम यह था कि एक-दो नहीं, पूरी पांच लेयर्स में खुद को लपेटना पड़ा था ! Watch the video-

Crossing Namika-La at 3700 m on way to Kargil

1- विंडचीटर, डाउन जैकेट/स्‍नो जैकेट, ऊनी कोट

सर्दी के इन महीनों में तापमान लगातार शून्‍य से नीचे रहता है। लेह और आसपास के इलाकों में औसतन -6°c से -22°c और लेह-श्रीनगर हाइवे पर करीब 200 किमी की दूरी पर बसे करगिल में -6°c से -26°c तक और द्रास में तो इससे भी कम हो सकता है। द्रास में जनवरी का महीना आमतौर पर सबसे ठंडा होता है और तब यहां अधिकतम तापमान -10°c और रात में अक्‍सर -28c के आसपास रहता है। द्रास (the second coldest habitable place in the world)अपने देश में सबसे ठंडा इलाका है और दुनिया में ऐसा दूसरा सबसे ठंडा स्‍थान है जहां लोग रहते हैं।

In Drass during Chillai-kalan (the harshest phase of winter), Jan 2021

इसलिए लद्दाख की सर्दी से निपटने के लिए अच्‍छे ब्रैंड की डाउन जैकेट, स्‍नौ जैकेट और भारी, ऊनी कोट जरूर साथ लेकर जाएं।

Harsh sun of Ladakh demands UV protection for skin+Eyes (Pic: Leh, Jan 2021)

2- नैक वार्मर, टोपियां, मफलर, ग्‍लव्‍स (गरम दस्‍ताने)

सर्दी से बचने के लिए ध्‍यान रखें कि सिर और गर्दन, हाथ-पैर हमेशा ढके हों। बाहर निकलें तो सिर को मंकी कैप, बालकलावा, ऊनी टोपी, बीनी वगैरह से ढकना न भूलें। यहां की बर्फीले सर्दी में ज़रा भी देर बिना दस्‍तानों के हाथ ठंड से जलने लगते हैं, लगता है जैसे उंगलियां कटकर अलग हो जाएंगी। बहुत ज्‍यादा ठंड लग जाने पर फ्रॉस्‍ट बाइट का खतरा भी हो सकता है। इसलिए हमेशा ग्‍लव्‍स पहनकर ही होटल रूम से बाहर जाएं। गर्दन से सर्दी न घुसें इसलिए मफलर/नैक वार्मर लपेटने में ही भलाई है।

Dress up like a local. layering is key (Pic: Kargil, Jan 2021)

जरूरी नहीं कि आप ब्‍लैक, ग्रे, ब्राउन जैसे बोरिंग शेड्स चुनें, अपनी ड्रैस से मेल खाते रंग-बिरंगे वूलन कैप/बीनी, मफलर/नैक वार्मर और फंकी ग्‍लव्‍स चुनें और अपनी लद्दाख के विंटरलैंड को चटखीले रंगों से आबाद कर दें।

चटख रंगों में फोटो/वीडियो भी गज़ब आएंगे

Choose colours to beat dull and drab mood of winter (Pic: Thiksey monastery, Jan 2021)

3- गरम-ऊनी इनर वार्मर, फुल स्‍लीव्‍स टी-शर्ट (ऊनी और सूती), गरम स्‍वेटर

 सबसे जरूरी है बदन को गर्म रखना। लेयरिंग करें यानी कई परतों में शरीर को ढकें। सबसे नीचे गरम इनर, ऊपर से पूरी आस्‍तीन की टी-शर्ट, पतला- गर्म स्‍वेटर पहनकर खुद को एकदम पैक कर लें। ऊपर से भारी जैकेट/कोट चढ़ा लें और आप हो जाएंगे विंटर रेडी

Winter ready in Kargil at -14°c on National Tourism Day, 2021

4- कम से कम 3 से 4 जोड़ी ऊनी जुराब और लैग वार्मर

 हफ्ते-दस दिन ठहरने का प्रोग्राम हो तो कम से दो-तीन ऊनी जुराब जरूर रखकर ले जाएं। वैसे लेह और करगिल के बाज़ारों में भी खूब रंग-बिरंगे, ऊनी जुराब आराम से मिल जाते हैं। और लैग वार्मर, जिन्‍हें डोचा भी कहते हैं, पैंट/लैगिंग्‍स के ऊपर से पहनकर आप खुद को न सिर्फ सर्दी से बचाएंगे बल्कि फैशनेबल भी दिखेंगे।

Cover exposed skin in cold air to not let the body heat escape (Pic: KhardungLa top, 5359 m, Feb 2021)

5- स्‍नो बूट्स, नी हाइ लैदर बूट्स

याद रखिए, माइनस में पारा हो और ऊपर से जब-तब हिमपात वाले मौसम में आपके स्‍पोर्ट्स शू, चप्‍पल-सैंडल किसी काम नहीं आने वाले। हाइ नी लैदर बूट्स और स्‍नो बूट्स के बगैर लद्दाख में सर्दी का सफर आपकी तफरीह पर काले साए की तरह होगा। इसलिए अच्‍छे ब्रैंड के बूट्स लेकर ही निकलिए।

Leather/Snow boots are must for winter

जरूरी हो तो लेह/करगिल के बाज़ार से स्‍नो बूट खरीद लें। केवल 500 रु में उपलब्‍ध स्‍नो बूट आपकी तत्‍काल जरूरत पूरी कर सकते हैं, लेकिन टिकाऊ, फैशन के हिसाब से बूट चाहिए तो बड़े शहरों से खरीदारी करें।

Local boys of Drass in harshest month of winter, Pic Jan 2021

6- लिप ग्‍लॉस, सन ब्‍लॉक क्रीम (50+एसपीएफ), मॉयश्‍चराइज़र, फेस स्‍क्रब

ये फैशन का नहीं, जरूरत का सामान है। समुद्रतल से कम से कम 11,500 फीट की ऊंचाई से जो सफर शुरू होगा (लेह एयरपोर्ट की ऊंचाई) उसमें हवा लगातार शुष्‍क बनी रहेगी और उस पर सूरज भी इतना तेज़ चमकता है वहां कि त्‍वचा को जलने में ज्‍यादा वक्‍़त नहीं लगता। इसलिए, जब भी होटल से बाहर जाएं तो कम से कम 50 एसपीएफ की सनक्रीम लगाना नहीं भूलें। लद्दाख की हवा में नमी ज़रा भी नहीं होती, इसलिए त्‍वचा आपको हर वक्‍त खुश्‍क दिखेगी। यानी उसे बार-बार मॉयश्‍चराइज़ करना जरूरी होगा।

एप्रिकॉट ऑयल (खुबानी/गुट्टी का तेल) का इस्‍तेमाल करें, रात में सोने से पहले नाक में दो-चार बूंद डाल लें ताकि चैन से नींद ले सकें (सोते समय नाक में खुश्‍की परेशानी बढ़ाती है)। एप्रिकॉट स्‍क्रब भी हफ्ते में एकाध बार इस्‍तेमाल करें जिससे त्‍वचा की मृत/जल चुकी कोशिकाओं को हटाया जा सके।

Tanned me in Leh market

वैसे इन सारे उपायों के बावजूद लद्दाख  में दस दिन का प्रवास आपकी स्किन को टैन किए बगैर नहीं मानेगा! इसे ‘लद्दाख स्‍टैंप’ मानकर स्‍वीकार कर लेना।

7- सनग्‍लास

तैनूं काला चश्‍मा जंचदा है  कि नहीं, मगर लेह की यात्रा में यह बहुत जरूरी है। एक तो तेज चमकती धूप से आंखों को बचाना जरूरी है, दूसरे चमकीली बर्फ में भी सनग्‍लास का इस्‍तेमाल सुकून देता है। और सफर में फंकी रिफ्लेक्‍टर्स आपका चेहरा-मोहरा सजाने के अलावा आपकी ट्रैवल फोटोग्राफी के लिहाज़ से भी एकदम मुफीद होते हैं।

8- और सबसे जरूरी है बहुत सारा हौंसला, आत्‍मविश्‍वास, उत्‍साह

 लद्दाख की भयंकर सर्दी और बेरहम ऊंचाई से डरने की बजाय यह सोचकर जाएं कि इस विषम भूगोल में नज़ारे और अनुभव भी कम न होंगे। वो भी एकदम नायाब। आमतौर पर ऐसे अनुभव हमें कहीं भी, कभी भी नहीं मिलते। इसलिए पूरी तैयारी के साथ जाएं, और हर दिन का नया अनुभव लेने के लिए तैयार रहें।

Road trips are fun in comfortable wear (Leggings, sports shoe, light jacket work well when exposure is less)

मुझे अक्‍सर लोग सिरफिरा समझते हैं कि दुनिया-जहां में जब सुखद और रूमानी मंजिलें पड़ी हों तो ऐसे में खुद को हलकान करने के लिए  लेह या द्रास की बुलंदियों पर निकलने की क्‍या पड़ी थी। दरअसल, वो मासूम हैं और नहीं जानते कि मेरा हर सफर मेरे पिछले सफर की दुश्‍वारियों को ठेंगा दिखाने के लिए होता है। हर बार नई मंजिल को चुनती हूं खुद की परख के लिए, यह समझने के लिए कि उसके नए और अनजाने समीकरण से कैसे तालमेल बिठाऊंगी। इस साल जनवरी-फरवरी में चुना देश के नए नकोरे केंद्र शासित प्रदेश (UT) लद्दाख को जबकि हाड़-मांस कंपा देने वाली सर्दी और हाइ एल्‍टीट्यूट का खतरनाक मेल कई तरह की चुनौतियां लेकर आता है। और ये मुश्किलें इतनी ज्‍यादा होती हैं कि यहां के कितने ही लोकल तक इस मौसम में अस्‍थायी रूप से पलायन कर जाते हैं! बर्फबारी, शून्‍य से नीचे जमा रहने वाला पारा, ताज़े फलों-सब्जियों की किल्‍लत, छोटे दिन और लंबी रातें, भारी हिमपात की वजह से कई इलाकों और यहां तक कि देश के दूसरे इलाकों से जोड़ने वाले राजमार्गों का महीनों बंद रहना, सिर्फ हवाई संपर्क कायम रहना जैसी चुनौतियां सुनने में चाहे जैसी लगीं लेकिन ज़मीनी हालातों में इन्‍हें झेलना आसान नहीं होता।

Local Aryan women of Kargil in stylish winter wear and traditional jewellery

बावजूद इन चुनौतियों के, लद्दाख की सर्द और खुश्‍क फ़‍िज़ा में कायनात इन दिनों कई अजब रंग घोलती है। जिंदगी में इन्‍हीं ‘लद्दाखी’ शोखियों के लिए निकल पड़‍िए ‘विंटर इन लद्दाख’ के यादगार सफर पर।

 

 

About Alka Kaushik

I am an Independent travel journalist, translator, blogger and inveterate traveller, based out of Delhi, India. I have been a food columnist for Dainik Tribune besides contributing or Dainik Bhaskar, ShubhYatra, Rail Bandhu, Jansatta, Dainik Jagran etc. My regular column on the portal The Better India - Hindi is a widely read and shared column with travel stories from around India.

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