10 Best Things To Do In Delhi & NCR

Let’s Explore offbeat Delhi during Spring (Feb-March)

चले आओ मेरे संग ऑफबीट दिल्ली के सफर पर

दिल्ली में घुमक्कड़ी, टहला-टहली का और कुनकुनी धूप में मीठी वाली सर्दी की सरगोशियां सुनने का यही महीना मुफीद है।

1. सुंदर नर्सरी की सैर हो जाए/ Visit Sunder Nursery

अगर अब तक नहीं किया है दीदार इस खूबसूरत सुंदर नर्सरी   का तो अब चले आइये। नर्सरी में बहार है, और हवा में भी खुनकी बाकी है।

Sunder Nursery – a little paradise in the heart of the capital

पूरे छह विश्‍व धरोहर स्‍थल मौजूद हैं इस नर्सरी में। यानी धरोहर प्रेमी हैं तो भी इस तरफ आना बनता है। 16वीं सदी के मुगलकालीन स्‍मारक लक्‍कड़वाला बुर्ज पहुंचने की राह इस झील के बाजू से गुजरती है।

Lake inside nursery is treat to all your senses

यार-दोस्‍तों से चैट बॉक्‍स में गपियाना छोड़कर, मौसम की मेहरबानियों को महसूस करने, सोखने, लुत्‍फ लेने के लिए भी इस सुंदर नर्सरी की सैर का बहाना बुरा नहीं है।

Plan a trip to connect with friends ”offline”

नज़दीकी मैट्रो स्टेशन: जोर बाग / हज़रत निज़ामुद्दीन 

2.  सैर, योग या हास्‍य सेशन के लिए लोधी गार्डन का ख्‍याल बुरा नहीं 

Head to Lodhi Garden for nature/heritage walk, Yoga/laughter session 

दिल्ली अगर बदन है तो लोधी गार्डन यकीनन उसका दिल है! वैसे यह शहर के बीचों-बीच खड़ा एक सुंदर उपवन है, जो करीब 90 एकड़ में फैला है। बड़ा गुंबद, शीश गुंबद, अठपुला, सिकंदर लोधी का मकबरा और दिल्ली सल्तनत के मुहम्मद शाह का मकबरा जैसे स्मारक भी इस विशाल बगीचे में खड़े हैं।

Heritage and nature walk groups are common in Lodhi Garden

लोधी गार्डन सप्ताह के सातों दिन, हरेक के लिए मुफ्त उपलब्ध है। सवेरे-शाम यह जॉगर्स पार्क, वॉकर्स पार्क, योग केंद्र, हास्य क्लब, डॉग पार्क जैसे अवतार धारण कर लेता है। परिवारों के लिए पिकनिक का अड्डा है तो मुहब्बतों में डूबी जोड़ियों के लिए सुकूनगाह से कम नहीं है।

lover’s paradise, too!

अब यहां प्री वैडिंग शूट, प्रेगनेंसी शूट कराने वालों से लेकर यूट्यूबर्स की गतिविधियां भी आम हैं। मतलब यह है कि मुगलकालीन मकबरों के इर्द-गिर्द फैला लोधी गार्डन, जिसे कभी लेडी विलिंगटन के नाम से जाना जाता है, आज हर दिल्ली वाले की मनपसंद शरणस्थली है। वीकेंड पर यहां हेरिटेज वॉक में हिस्सा लें या योगा/हास्य क्लब के सेशंस में शिरकत करें, या यों ही टहलने चले आएं, मन बहलाने निकल आएं इस तरफ।


शहर के पेड़-पौधों, फूलों से वाकफियत बढ़ानी हो तो लोधी गार्डन की नेचर वॉक पर निकल आएं, किसी बॉटेनिस्ट की उंगली थामकर!

नज़दीकी मैट्रो स्टेशन: जोर बाग

3. बुकस्‍टोर्स में करेंं किताबों की संगत/ Visit Iconic Bookstores 

दुनिया जाती है किंडल और पोर्टलों की शरण में तो जाए, हमारे-आपके जैसे अभी इतने तो बचे हैं कि उनकी बदौलत राजधानी में कई बुकस्टोर भी अपनी हस्ती शान से संभाले हैं। इस शहर से मुहब्बतनामा लिखने के लिए जरूरी है इसकी हर शय से मुहब्बत करना और बुकस्टोर्स उनमें से ही हैं। चलिए बताते हैं आपको कुछ खास बुकस्टोर्स के बारे में :

  • ऑक्सफोर्ड बुकस्टोर, क्नॉट प्लेस बाहरी संस, खान मार्केट
  • ओम बुकस्टोर, जीआईपी मॉल, नोएडा
  • सीएमवाईके, ग्रेटर कैलाश पार्ट 2
  • फुल सर्कल बुकशॉप एंड कैफे टर्टल (निज़ामुद्दीन ईस्ट और खान मार्केट)

4. कोरोनेशन मेमाोरियल  की सैर/  Visit Coronation Park 

कोरोनेशन पार्क या कोरोनेशन मेमोरियल – उत्तरी दिल्ली में हमारी दिल्ली के ऐतिहासिक अतीत का यह कोना छिपा है। इसे नहीं देखा तो दिल्ली में क्या देखा! यह वही स्थल है जहां 1911 में दिल्ली दरबार लगा था और जॉर्ज पंचम ने हिंदुस्तान की राजधानी कोलकाता से दिल्ली बसाने की घोषणा की थी। हो सके तो किसी हेरिटेज वॉक लीडर की उंगली थामकर यहां सैर की योजना बनाइये ताकि आप जान सकें कि कंक्रीट की विशाल मूर्तियों और चबूतरे पर खड़ी मीनार असल में क्या कुछ राज़ छिपाए है।

Heritage site – Coronation memorial was the venue of Delhi Darbars of 1867 & 1911

और हां, एक राज़ की बात बताते चलें आपको। कोरोनेशन मेमोरियल परिसर से बाहर सड़क पार बने निरंकारी सरोवर में बाग-बगीचों (landscaped gardens) का दीदार करें और बेहतरीन कैंटीन सर्विस का लुत्फ उठाएं।

निरंकारी सरोवर

राजधानी के उत्तरी इलाके में है यह आकर्षण।

नज़दीकी मैट्रो स्टेशन: जी.टी.बी. नगर 

5. निकलसन कब्रगाह  / Visit Nicholson cemetry 

1857 के बाद यह ईसाई कब्रगाह बनाया गया था। यहां ब्रिटिशकाल की कई कई महत्‍वपूर्ण हस्तियां, रोग वगैरह की वजह से बेमौत मारे गए बच्चाेंं, प्रसव में मौत की गोद में समा गईं माताओं, युद्ध में शहीद हुआ किशोर सैनिकों की कब्रें हैं। 1857 के गदर में अहम् भूमिका निभाने वाले ब्रिगेडियर जनरल जॉन निकलसन की कब्र भी यहीं है।

ASI protected Nicholson’s grave in the cemetry

बेल्जियाई हिंदी विद्वान फादर कामिल बुल्‍के भी यहीं दफ्न हैं।

It’s a cemetry, not a picnic place

हो आइये, मौसम जब तक साथ दे रहा है राजधानी के ऐसे स्थलों को देख आने का मौका अच्छा है। अलबत्ता, जब इस कब्रगाह को देखने जाएं तो कतई न भूलें कि यह कोई पिकनिक स्पॉट नहीं है। बहुतों की यादें भी यहां दफ्न हैं। आज भी इंग्लैंड से कुछ लोग यहां चले आते हैं, अपने मरहूम रिश्तेदारों से ‘मिलने’। उनके लिए यह जगह किसी तीर्थ से कम नहीं है।

नज़दीकी मैट्रो स्टेशन: कश्मीरी गेट

6. क्राफ्ट म्‍युज़ियम / Explore Crafts Museum

‘Crafting’ happiness at Craft Museum

दिल्ली आज भी कहीं—कहीं शांत मुद्रा में दिख जाती है, शिल्प संग्रहालय ऐसी ही एक जगह है। देशभर के कितने ही शिल्प यहां जमा हैं — मधुबनी पेंटिंग हैं और कर्नाटक की मूर्तिकला है तो राजस्थान की फड़ चित्रकला भी है।

सबसे अच्छी बात यह है कि मेरे शहर के इस कोने ने धीरे—धीरे लोगों की स्मृतियों से गुम होना शुरू कर दिया था, बरसों पहले। संग्रहालय आज भी कायम है, बस बहुत भीड़—भड़क्का नहीं है।

परिसर में ही है ‘पिजन हाउस’ (pigeon house) — यानी काठ और धातु का बनाया वो चबूतरा जिसे पंछियों को दाना खिलाने के लिए बनाया जाता है। गुजरात में ऐसे चबूतरों की परंपरा मिलती है।

‘पिजन हाउस’ (pigeon house)

कभी-कभी किसी आर्ट या क्राफ्ट फेस्टिवल का मंच भी सजता है इसी जगह पर। या हस्तकलाओं और हस्तशिल्पों की ऐसी प्रदर्शनी भी लगती है। फिलहाल, पूरे महीने यानी 31 मार्च तक इस एग्ज़ीबिशन कम सेल का आनंद लिया जा सकता है।

और लौटने से पहले कैफे लोटा (stylish cafe Lota in Crafts Museum)  में एक से एक लज़ीज़ व्यंजनों का लुत्फ लेना नहीं भूल जाना!

नज़दीकी मैट्रो स्टेशन: सुप्रीम कोर्ट 

7. इंडिया हैबिटाट सेंटर में कला, सिनेमा, प्रदर्शनी/Spend a day at India Habitat Centre (IHC)

शहर की सांस्कृतिक फितरत देखनी हो तो इस ओर चले आना चाहिए। इंडिया हैबिटाट सेंटर में हर दिन हरेक के लिए कुछ न कुछ होता है। मसलन, पूरे मार्च के दौरान ढेरों कला प्रदर्शनियां, आर्ट वर्कशॉप, फिल्म फेस्टिवल, म्युज़िक से लेकर और भी बहुत कुछ। इस महीने यहां इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल लगने जा रहा है।

IHC – nothing less than an oasis

लोधी गार्डन में सवेरे की सैर के बाद इस ओर निकल आइये, अमेरिकन डाइनर में डटकर ब्रंच और फिर आर्ट-वार्ट में डूब जाइये! कुछ और खाने को जी ललचाए तो हैबिटाट के एक अन्य रेस्टॉरेंट ‘इटोपिया’ भी जाया जा सकता है।

नज़दीकी मैट्रो स्टेशन: जोर बाग

8. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र — सांस्कृतिक तफरीह का अड्डा /Visit IGNCA for cultural glimpses

दिल्ली को जब मैं सांस्कृतिक नगरी कहती हूं तो यों ही बेवजह नहीं कहती। यहां ऐसे कितने ही ”अड्डे” हैं जहां पहुंचकर कला, शिल्प, लोक-परंपराओं, क्षेत्रीय उत्सवों, प्रादेशिक खान-पान, साहित्योत्सवों, सांस्कृतिक गलियारों में गुम हुआ जा सकता है। पूरे महीने भर की प्रदर्शनियों, उत्सवों, आयोजनों के लिए वेबसाइट टटोलने से गुरेज़ कैसा! और हां, अगर आपकी दिलचस्पी कुछ दिलचस्प कोर्स करने की है तो इन सर्टिफिकेट पाठ्यक्रमों और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों को भी देखा जा सकता है, अलबत्ता, इनका दायरा मार्च से कहीं आगे तक फैला है।

नज़दीकी मैट्रो स्टेशन: सैंट्रल सेक्रेटेरियट, उद्योग भवन, पटेल चौक

9. गांधी ट्रेल पर निकल जाएं / Follow Gandhi’s trail in the capital

गांधी शरणम् गच्छामि

राजधानी में गांधी जी की यादों से जुड़ी कुछ बेहद खास मंज़िलें हैं:

10. म्युज़ियो कैमरा / Visit one of a kind museum of Photographic Arts

फोटोग्राफी की जादुई दुनिया के सफर पर चलने का इरादा हो तो इस अद्भुत संग्रहालय –  म्‍युज़‍ियो कैमरा में कम से कम आधा दिन बिताने से कतई न चूकें। आप पेशेवर फोटोग्राफर हैं, शौकिया फोटोग्राफी करते हैं या फोटोग्राफी से ज़रा भी वाकिफ नहीं हैं, मगर सीखना चाहते हैं तो यही आपकी मंज़िल है। यहां दुनियाभर के करीब 100 देशों से जमा किए एंटिक कैमरों का एक विशाल संग्रह मौजूद है। फोटोग्राफी पर कोर्स,  एग्ज़ीबिशन, वर्कशॉप हैं और यहां तक कि म्युज़ियम का गाइडेड टूर भी है।


और हां, हमने यह तो बताया ही नहीं कि म्युज़ियो कैमरा कोई सरकारी या संस्थागत पहल नहीं है, बल्कि एक इंसान के जज़्बे और जुनून का नाम है। फोटोग्राफर आदित्य आर्या ने पिछले चार दशकों में दुनियाभर के कबाड़ी बाज़ारों, कैमरा मार्केटों से लेकर अपने जुनून के दम पर इस संग्रहालय को साकार कर दिखाया है।

हिंदुस्तान का सबसे बड़ा विंटेज फोटोग्राफी कलेक्शन मौजूद है संग्रहालय में। अकेले,दुकेले या पूरे परिवार के लिए बेहतरीन मंज़िल।

 

About Alka Kaushik

I am an Independent travel journalist, translator, blogger and inveterate traveller, based out of Delhi, India. I have been a food columnist for Dainik Tribune besides contributing or Dainik Bhaskar, ShubhYatra, Rail Bandhu, Jansatta, Dainik Jagran etc. My regular column on the portal The Better India - Hindi is a widely read and shared column with travel stories from around India.

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