where to travel in 2015

2015 ला रहा है कुछ हटकर, कुछ खास सैरगाह

 

बीतते साल के साथ एक बात जो जाते-जाते खुश करती गई वो यह कि 2015 में कई लंबे वीकेंड मिलने जा रहे हैं और उन लोगों के लिए यह खबर वाकई खास है जो घरों के सुकून को छोड़कर दूर किसी मंजिल को तलाशने का उत्साह और जज़्बा रखते हैं। कम से कम सात वीकेंड ऐसे आ रहे हैं इस साल जब आपका दो दिन का वीकेंड तीन से चार दिन का होगा। यानी अपने-अपने शहर की हदों को पार 200 से 400 किलोमीटर तक के फासले नापने का मौका आपको मिलेगा। तो क्यों न इन छुट्टियों का भरपूर फायदा उठाया जाए, नई जमीन टटोली जाए, नए मुकाम तलाशे जाएं!

कॉफी की गलियों में कुर्ग

ज़माना और वक़्त है कुछ अलग करने का और अलग भी कुछ अलग अंदाज़ में करने का! चाय  बागानों की सैर अब पुरानी बात हुई, आप सैर कर आइये कॉफी प्लांटेशन की। कर्नाटक में आईटी हब बेंगलुरु से कुर्ग का सफर 5 घंटे में पूरा होता है और आप पहुंच जाते हैं धुंध से ढके कॉफी बागानों में। दक्षिण की सर्दियां भी उत्तर भारत की ठंड के आगे कुछ हल्की होती हैं, लिहाजा उनके लिए यह ठिकाना और भी माकूल है जो ज्यादा ठंड बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं।

चाय के बागानों से वाकफियत अब कोई बहुत दुर्लभ नहीं रह गई है, लेकिन कॉफी बीन्स का बागान से आपके कप तक का सफर वाकई दिलचस्प होगा। ‘बीन टू कप’ प्लांटेशन गाइडेड टूर चुनें और कॉफी के साथ अपनी दोस्ती निभाएं। नज़दीक ही इरपु जलप्रपात है, तीर्थस्थल तालकावेरी है और शहरी शोरशराबे से दूर बौद्ध नगरी बायलाकुपे भी है।

नॉर्थईस्ट भी बनाएगा सैलानियों के मानचित्रों पर जगह

पूर्वोत्तर मुख्यधारा से कटा हुआ सही लेकिन बीते कुछ समय से चर्चा में रहा है। नए दौर के सैलानी अब धीरे—धीरे इसे भी अपने टूरिज़्म मानचित्र पर सजाने लगे हैं। असम में काज़ीरंगा के बाद अगर कोई जगह तेजी से पसंद की जा रही है तो वो है सिक्किम। बहार देखनी हो तो 1 से 30 मई के दौरान गंगटोक, सिक्किम में अंतरराष्ट्रीय फूल प्रदर्शनी देखने चले आइये। आॅर्किड की एक से एक दुर्लभ वैरायटी, वनस्पति जगत का चमत्कार कहा जाने वाला पिचर प्लांट, तरह—तरह के फर्न, मॉस, लाइकेन जैसे अजीबोगरीब पेड़-पौधे यहां के बॉटेनिकल गार्डन क्या सड़कों के किनारे, घाटियों में, पहाड़ियों पर यों ही उगे हैं। गंगटोक की हदों से बाहर निकलने की ठान लेंगे तो युमथांग घाटी को इस मौसम में फूलों की घाटी की तरह पाएंगे।

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famed one horned rhino in Kaziranga

 

नॉर्थ ईस्ट का ही एक और खूबसूरत राज्य है मेघालय जो पर्यटकों को भा रहा है। राजधानी शिलॉन्ग में उमियम झील में बोटिंग हो या जीवित जड़ों से बुने पुलों को देखना हो तो मेघालय आना बनता है। और चेरापूंजी का आकर्षण भी कुछ कम है क्या ? यों अब चेरापूंजी में सबसे ज्यादा बारिश नहीं होती, नज़दीकी मॉसिनराम के माथे पर यह ताज अब सज चुका है तो भी चेरापूंजी का बरसों पुराना रोमांस आज भी कायम है। और फिर फेसबुक चेक-इन के लिए भी यह बढ़िया ठिकाना है! यकीन न हो तो इस बार आजमा लो ..

उधर, अरुणाचल में ही तवांग और नामदाफा अभयारण्य अब पर्यटन सूची में शुमार हो चले हैं। इससे पहले कि पूर्वोत्तर के ये ठिकाने भी आम हो जाएं, क्यों​ न इसी साल इन्हें टटोला जाए।

अलबत्ता, इतना याद जरूर रखें कि पूर्वोत्तर की सैर पर निकलना कन्याकुमारी जाने जैसा अनुभव नहीं है। दूरी के लिहाज से बेशक, अरुणाचल-मेघालय-सिक्किम-असम जैसे राज्य हमें देश के दक्षिणी राज्यों जितने ही दूर दिखें मगर सच तो यह है कि यहां पब्लिक ट्रांसपोर्ट की स्थिति वैसी नहीं है जैसी देश के दूसरे कई भागों में है। दूसरे, ज्यादातर हिस्सा पहाड़ी है, सुदूरवर्ती है और ऐसे में प्राइवेट टैक्सियों से दूरियों को नापना मंहगा सौदा साबित होता है। इसके अलावा, एक और बात जो याद रखनी होती है वो यह कि भागमभाग वाला पर्यटन पूर्वोत्तर में काम नहीं आता। यहां तो बस फुर्सत लेकर आना पड़ता है। यानि तसल्ली को दूसरा नाम है पूर्वोत्तर।

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tea garden near Jorhat, Assam

 

ध्यान रखें, ज्यादातर पूर्वोत्तर भारत जनजातीय इलाका है, उनकी रवायतें, रहन-सहन, खान-पान और बोलियां शेष हिंदुस्तान से फर्क है। उनकी इस अलग पहचान का सम्मान करते हुए नॉर्थ ईस्ट के सफर पर आएंगे तो एक-एक पल का अच्छा मोल पाएंगे। मेघालय के मातृ-सत्तात्मक समाज से लेकर नगालैंड के मांसभक्षी जीवन को नज़दीक से देखकर आप हैरत में पड़ जाएंगे और सही मायने में महसूस करेंगे कि कितनी-कितनी विविधताओं का नाम है हिंदुस्तान!

टूरिज़्म का नया फलसफा पेश करेगा नए साल में छत्तीसगढ़

जिनके लिए मध्य भारत का यह राज्य नक्सली ज़मीन का पर्याय है उन्हें अब अपनी सोच बदलनी होगी। केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ को टूरिज़्म हॉटस्पॉट के तौर पर पहचान दिलाने के लिए कुछ ठोस पहल की हैं जिनमें राज्य में टूरिस्ट पुलिस की तैनाती से लेकर 24 X 7 घंटे कार्यरत टूरिस्ट हैल्पलाइन जैसी पहल प्रमुख हैं। ये सारी तैयारियां इसलिए ताकि छत्तीसगढ़ अपनी नक्सली छाया से बाहर आ सके। राज्य के दक्षिण में बस्तर जैसे प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर ठिकाने दुनिया के सामने निखर सकें, वन अभयारण्यों से लेकर जल प्रपातों तक का आकर्षण खुलकर सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर सके। छत्तीसगढ़ की ट्राइबल संस्कृति दुनियाभर के पर्यटकों के लिए न्योता साबित हो सकती है और आदिवासी जनजीवन को नज़दीक से देखने, अनुभव कराने वाला यह ठिकाना इको-टूरिज़्म हब के तौर पर खुद को स्थापित कर सकता है।

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Buddha

इस साल कुछ अलग-सा, कुछ खास-सा करने का मन हो तो छत्तीसगढ़ को चुनें अपनी पर्यटन मंजिल। शुरूआत 16 से 18 जनवरी के दौरान यहां आयोजित होने जा रहे सिरपुर अंतरराष्ट्रीय नृत्य और संगीत समारोह से की जा सकती है। इसी बहाने राज्य में बौद्ध परंपरा की जड़ों को टटोलने चले आइये। सिरपुर में है भारत का सबसे पुराना और सबसे भव्य ईंटों से निर्मित लक्ष्मण मंदिर और बस इसी की पृष्ठभूमि में पूरे तीन दिन तक हिंदुस्तान के कोने-कोने से उमड़ी सांस्कृतिक झलकियां सिरपुर महोत्सव का हिस्सा बनेंगी। कल्चरल टूरिज़्म में है दिलचस्पी तो सिरपुर आना बनता है इस बार!

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Laxman Temple @Sirpur

 

हर साल की तरह फरवरी मार्च में माघ पूर्णिमा से शिवरात्रि तक छत्तीसगढ़ के प्रयाग यानि राजिम में कुंभ मेला लगेगा। महानदी, सोंढूर और पैरी नदियों के इस संगम पर जुड़ने वाले अध्यात्मिक मेले में भी शामिल हुआ जा सकता है।

इसके अलावा, जुलाई-अक्टूबर में 75 दिनों तक चलने वाला दशहरा देखने जगदलपुर का टिकट कटा लें। करीब ही नियाग्रा जल प्रपात को टक्कर देता बस्तर का अपना आकर्षण यानी चित्रकोट जल प्रपात है। प्रकृति से नज़दीकियों का दूसरा नाम है छत्तीसगढ़ और इस अहसास को पुख्ता करने के लिए यहां आना ही होगा।

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Chitrakot Fall, Bastar

 

भूल जाइये कि किसी अफरातफरी का नाम है छत्तीसगढ़ या कि ट्राइबल है तो गाड़ियों-हाइवे से महरूम होगा। राजधानी रायपुर के स्वामी विवेकानंद हवाईअड्डे की चकाचौंध आपके मुगालते मिनटों में दूर कर देगी और राज्य के एक कोने से दूसरे कोने को जोड़ती फर्राटा सड़कें इस भ्रम को चुटकियों में मिटा देंगी कि आप किसी पिछड़े राज्य में सैर-सपाटे पर निकले हैं। छत्तीसगढ़ टूरिज़्म बोर्ड सीटीबी की रिहाइशी यूनिटें जगह-जगह मिल जाएंगी और सीटीबी के टूरिज़्म पैकेज भी उपलब्ध हैं जो इस नई पर्यटन मंजिल को टटोलने में मददगार साबित होंगे।

रुख करें लक्षद्वीप का

गोवा के समुद्रतटों के बाद बीते सालों में अंडमान पर्यटकों की पसंदीदा मंजिल बनता रहा है। वॉटर स्पोर्ट्स से लेकर हनीमून डेस्टिनेशन तक के रूप में अंडमान के हैवलॉक—चिड़िया टापू तक पर्यटकों की जुबान पर छाए रहे। लेकिन 2015 में स्कूबा—स्नॉर्कलिंग के नए ठिकाने के तौर पर लक्षद्वीप को खंगालना नया अनुभव होगा।

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यहां अक्टूबर से मई के शुरूआती दिनों तक मौसम माकूल रहता है, मई से सितंबर तक बारिश की वजह से पानी के जहाज़ों से यहां पहुंचना मुश्किल होता है लेकिन तो भी कोच्चि से उड़ानों की आवाजाही बनी रहती है। और अगाती तथा बांगाराम टापू तो मानसूनी महीनों में सुहाने होते हैं। उस पर बारिश से हरियाली ओढ़ चुकी लक्षद्वीप की धरती बेहद खूबसूरत रूप ले चुकी होती है। नेचर टूरिज़्म या स्पोर्ट्स टूरिज़्म में रुचि रखते हैं तो क्यों न 2015 में नई राह चुनी जाए!

ओडिशा ओलिव रिडले कछुओं और भगवान जगन्नाथ की धरती की सैर

यह सच है कि देश में कुछ जगहें पर्यटन के लिहाज से काफी घिस-पिट चुकी हैं। बार-बार उन जगहों पर कौन लौटना चाहेगा जहां बचपन में गर्मियों की छुट्टी से लेकर कॉलेज में दोस्तों के साथ भी आते-जाते रहे होते हैं। और तो और हनीमून के ठिकाने भी वही बनते आए हों। लेकिन किसने रोका है 2015 में आपको कुछ नया चुनने, देखने, महसूसने और अनुभव करने से! देश के कुछ राज्य अगर टूरिज़्म की दृष्टि से ‘ओवररेटेड’ या ‘हाइप्ड’ हो चुके हैं तो कई अभी कोने में दुबके हुए, छिपे हुए, सहमे-सहमे से भी हैं। और ऐसा नहीं है कि उनके पास टूरिस्टी आकर्षणों का अकाल है। बल्कि इससे उलट वहां बहुत कुछ है जो अनदेखा, अनजाना या ऐसा है जिसे जानना रोचक हो सकता है। ओडिशा ऐसा ही ठिकाना है जहां नेचर से लेकर एडवेंचर तक, अध्यात्म से लेकर संस्कृति तक सभी उपलब्ध है। ओडिशा के कोरापुट में आदिवासी जन-जीवन की झलक देखने से लेकर एशिया में खारे पाने की सबसे बड़ी झील चिल्का में परवाज़ भरते पंछियों को देखने जाया जा सकता है। राज्य में इन दिनों शीत उत्सव (9 से 12 जनवरी) भी चल रहा है।

कटक में नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जन्मस्थली देखने का मौका आपको मिलेगा और इसी राज्य में है चांदीपुर तट जहां से हर साल जाने कितनी ही मिसाइलों के रूप में हिंदुस्तान की महत्वाकांक्षाएं उड़ान भरती हैं। बेशक, यह जगह आम पर्यटक के लिए नहीं हैं लेकिन भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के बहाने, कोणार्क के सूर्य मंदिर के बहाने जब आप इस सरजमीं पर होंगे तो देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम की महक को भी महसूस करने से चूकेंगे नहीं।

भुवनेश्वर का बीजू पटनायक इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश के अलग—अलग भागों से जुड़ा है। और रेल—सड़क मार्ग तो है ही। फिर किस बात का सोच—विचार!

 

महाराष्ट्र है कुछ बिंदास, कुछ खास

इस पश्चिमी राज्य में छोटे-बड़े करीब सात सौ किले हैं जहां हर वीकेंड पर ट्रैकिंग के दीवानों को चढ़ाई चढ़ते देखा जा सकता है। पश्चिमी घाट का सौंदर्य भी किसी से छिपा नहीं है। रत्नागिरी जैसे इलाके हैं जो अपने घर-आंगन में बेहद खूबसूरत समुद्रतटों को छिपाए हैं। गणपतिपुले जैसे समुद्री किनारे हैं और सच तो यह है कि इसी राज्य में अरब सागर ने जाने कितने मोतियों को संजोया है। और सबसे अच्छी बात यह है कि सैलानियों के जत्थों की नज़र अभी तक इन जगहों पर नहीं पड़ी है। यानी वर्जिन महाराष्ट्र आपके इंतज़ार में है। 2015 में इस नई सैरगाह को चुनना यकीनन खास होगा।

 

 

 

About Alka Kaushik

I am an Independent travel journalist, translator, blogger and inveterate traveller, based out of Delhi, India. I have been a food columnist for Dainik Tribune besides contributing or Dainik Bhaskar, ShubhYatra, Rail Bandhu, Jansatta, Dainik Jagran etc. My regular column on the portal The Better India - Hindi is a widely read and shared column with travel stories from around India.

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