Are you chilling in the capital in December?

Watch a classic love story, a flaming romance and man’s inner cosmos of emotions and desires!

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“The Peony Pavillion” 

Dec 12, 2014 at Siri Fort, New Delhi

Time: 7:00pm – 9:00pm

दिल्ली की सर्द शामों में आर्ट और कल्चर की जो साजिशें होती हैं, बस उन्हीें से बेपनाह मौहब्बत है मुझे। पूरे साल भर इस शहर से गायब रहने वाली मेरी रूह और काया नवंबर के बाद यहां जैसे अपने लंगर डाल देती हैं। लटयंस की दिल्ली की सड़कों को लगभग हर दिन नापती हूं, वो पुराने अशोक-जामुन के पेड़ों के साए जब राजपथ पर पसरती शाम के संग लंबे होते—होते सांझ के झुटपुटे में समा जाते हैं तब चुपचाप एक सिहरन उतरती है इंडिया गेट के लंबे मैदान पर … हवा में सफेदी झिलमिलाती है और कोहरे की चादर तानकर शहरों का शहर दिल्ली तब कुछ-कुछ रूमानी हो आता है। बस, इसी वाले दिल्ली शहर के इश्क में हैं हम इन दिनों। और आप ?

अगर अभी तक नहीं मालूम कि क्या करेंगे अगले कुछ महीनों में इस दिल्ली की सर्दी का तो मेरी सुनो! हेरिटेज वॉक, फूड वॉक, नेहरू-लोधी पार्क में सैर और धूप को जी-भरकर लूटने का इरादा कर लो। हर दिन आर्ट-कल्चर से मुठभेड़, कभी हिंदुस्तानी संगीत तो कभी शास्त्रीय नृत्य और जब इनसे मन भर जाए तो चाइनीज़ ओपेरा। ठीक सुना आपने, चीन के बरसों पुराने … नहीं-नहीं सदियों पुराने मिंग राजवंश (Ming Dynasty) के दौर में Tang Xianzu ने जिस नाटक को लिखा था और जिसे पहली दफा 1598 में मंच पर खेला गया उसी का अगला शो राजधानी में खेले जाने के लिए तैयार है।

Zhang Yuanyuan as Du Liniang

Kunqu Opera Brings “The Peony Pavilion” to India

क्विन चू (Kunqu) इसे आप और मेरे जैसे कला प्रेमियों के लिए दिल्ली ला रहे हैं। यों एक शो मुंबई (Dec 9, 2014 at NCPA, Mumbai ) में भी होगा। यूनेस्को ने 2001 में दुनिया की वाचाल और अमूर्त मानवीय विरासत के अद्भुत मास्टरपीस (Masterpieces of the Oral and Intangible Heritage of Humanity ) के तौर पर इसे मान्यता दी थी। 

Shao Zheng as Liu Mengmei
Shao Zheng as Liu Mengmei

क्विन चू (Kunqu) में ड्रामा, ओपेरा, बैले, काव्य पाठ और संगीत रस की रवानी होगी जो दरअसल, प्राचीन चाइनीज़ थियेटर के तत्वों अंगविक्षेप (mime), स्वांग (farce), कलाबाजी (acrobatics), गाथागीत (ballad ) और मेडली (medley) से प्रेरित हैं। इनमें से कुछ की जड़ें तो ईसा पूर्व तीसरी सदी तक चली गई हैं! 

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क्विन चू (Kunqu) की जुबान कुंशन (Kunshan) या सोझाउ (Suzhou) नहीं है और न ही मंदारिन (Mandarin) है। सच तो यह है कि यह रंगमंच की कृत्रिम भाषा में है, कुछ—कुछ परिष्कृत मंदारिन की तरह जिसमें स्थानीय बोली की भी सुगंध फैली है। 

लेकिन हिंदुस्तानी दर्शकों के लिए मंच के दोनों तरफ लाइव एलईडी स्क्रीन होंगी जिन पर अंग्रेज़ी ट्रांस्क्रिप्शन दिया जाएगा। 

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दिल्ली की सर्दी में इतना रोमांच बुरा तो नहीं, है न! कुछ झलक देखनी हो इस चाइनीज़ ओपेरा की तो यहां हो आइये, इस लिंक पर 2 मिनट का वीडियो है … न.. न टीज़र कहते हैं हम इसे!

http://www.youtube.com/watch?v=iIO6TOuXorI

“The Peony Pavilion” को दिल्ली और मुंबई के मंचों पर लाने का पूरा श्रेय भरतनाट्टयम नृत्यांगना और कोरियोग्राफर स्वाति भिसे के Bravia Sadir Theater Festival को जाता है।

यानी सूदूर—पूर्व की इस रंगमंचीय विरासत को दिल्ली के जाड़े में देखने का पूरा इंतज़ाम है।

तो क्या ख्याल है! अजी, छोड़िए वीकेंड गेटवेज़ और टूरिज़्म के नखरे, अप्पन तो यहीं रहने वाले हैं अब नए साल तक! 

Ms. Swati Bhise, Artistic Director of Bravia Sadir Theatre Festival Prod...
Ms. Swati Bhise, Artistic Director of Bravia Sadir Theatre Festival

About The Peony Pavilion

The Peony Pavilion is an enthralling love story of Du Liniang, the young daughter of a high official, who meets a young scholar named Liu Mengmei in her dream. The lyrical prose of The Peony Pavilion weaves a fabric of nuances and metaphors that elegantly transgresses the divide between the beauty of nature and man’s inner cosmos of emotions and desires. It also drives forth the persistent tone of youthful optimism.

It is a play written by Tang Xianzu in the Ming Dynasty and first performed in 1598 at the Pavilion of Prince Teng. One of Tang’s ‘Four Dreams’, it has traditionally been performed as a Kunqu opera, but Chuan and Gan opera versions also exist. It is by far the most popular play of the Ming Dynasty, and is the primary showcase of the guimendan role type. All Kun theatre troupes include it in their repertoire. Recent adaptations have sought to inject new life into one of China’s best-loved classical operas, though such efforts have met with opposition from the Kun opera traditionalists. Today it is a regular performance at ancient Imperial Granary Beijing. The play stars Zhang Yuanyuan and Shao Zheng.

for further event detail – 

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About Alka Kaushik

I am an Independent travel journalist, translator, blogger and inveterate traveller, based out of Delhi, India. I have been a food columnist for Dainik Tribune besides contributing or Dainik Bhaskar, ShubhYatra, Rail Bandhu, Jansatta, Dainik Jagran etc. My regular column on the portal The Better India - Hindi is a widely read and shared column with travel stories from around India.

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