Mughal Road – highway to paradise

 

बीते साल जम्मू से श्रीनगर जाने के लिए मुगल रोड पकड़ी थी। यह वही सड़क थी जिस पर मुगल बादशाह जहांगीर अपने लाव—लश्कर के साथ लाहौर से कश्मीर आया-जाया करता था। और यहीं इसी सफर में कश्मीर से लाहौर लौटते हुए उसका इंतकाल भी हो गया था। बहरहाल, वो किस्सा फिर कभी। अभी तो राजौरी में चनाब पर पुल से गुजरते हुए सुबह का यह नज़ारा याद आ रहा है।

Image
Serene Chenab in Rajouri, J & K almost at the fag end of its journey inside India, she will soon enter Pakistan before meeting Arabian Sea

 अखनूर से निकलते ही हम राजौरी में दाखिल हो चुके थे। माहौल में धुंध थी, और पूरे माहौल में एक असहज चुप्पी पसरी हुई थी। सिर्फ हमारे दिल की धड़कनों का शोर उस चुप्पी को भंग कर रहा था। सहमना क्या होता है, इसका अहसास उस रोज़ मुझे बखूबी हुआ था …. और ठीक उस घड़ी पूरब में धुंध की चादर को धीमे से उठाते हुए सूरज की यह अठखेली दिखायी दी … दुनियाभर में जाने कहां कहां के सूर्योदय और सूर्यास्त के बखान सुने हैं अब तक, लेकिन चनाब पर से उगता सूरज भी इतना हसीन दिखता होगा, किसी ने नहीं बताया …

Image
sunrise over River Chenab near Rajouri, J & K, India

 

About Alka Kaushik

I am an Independent travel journalist, translator, blogger and inveterate traveller, based out of Delhi, India. I have been a food columnist for Dainik Tribune besides contributing or Dainik Bhaskar, ShubhYatra, Rail Bandhu, Jansatta, Dainik Jagran etc. My regular column on the portal The Better India - Hindi is a widely read and shared column with travel stories from around India.

View all posts by Alka Kaushik →