Thailand – destination which was not my dream destination!

वो पिछले दस साल से थाइलैंड की टिकट बुक करवाने की फरमाइश करता आ रहा है, और मैं हर बार उसे ’अगली बार‘ कहकर बहला देती हूं …. क्यों नहीं गई मैं थाइलैंड अब तक ? क्या मैं जाना नहीं चाहती ? क्या रखा है उस नन्हे देश में ? मेरे हिंदुस्तान में भी ऐसे कई ठिकाने हैं, फुकेट का तोड़ हमारे गोवा के पास है, मेकोन्ग के पानी पर नौका खेने का मज़ा क्या हमारी डल और केरल के बैकवॉटर्स के अनुभव से अलग होगा ? और बैंकॉक में शॉपिंग के अड्डे भी लुभा नहीं सकते मुझे, बहुत ही अटपटी ट्रैवलर हूं मैं जिसे घुमक्कड़ी के साथ शॉपिंग की घालमेल कतई पसंद नहीं। तो इस सबका नतीजा यह रहा है कि आज तक थाइलैंड मेरी ’टू डू‘ लिस्ट का हिस्सा ही नहीं बन पाया। और ठीक इसी वजह से सिंगापुर या मलेशिया भी नहीं गई।

लेकिन एक रोज़ कोलकाता से बैंकाक तक एयर एशिया के एयर फेयर सुने तो बिन सोचे, बिन विचारे ऐलान कर डाला मैंने – ’थाइलैंड ही होगी मेरी अगली मंजिल .. यकीनन!‘ सोचने को कुछ ज्यादा था भी नहीं, बरसों से जिन कारणों से थाइलैंड को नकारती आयी थी वही सब तो आकर्षण थे उस दक्षिण-एशियाई मोती के, वही तो लुभाते आए हैं साल-दर-साल सैलानियों को और मेरे भीतर छिपे नोमेड ने भी न-न करते-करते आखिरकार यह मान लिया था कि थाइलैंड ‘डूएबल‘ है।

ट्रैवलिंग खर्च की ‘चुनौती’ एयर एशिया ने एक झटके में मिटा दी है और मेरे सामने वो मंजिल है जिसे नकारने के लिए इतने बहाने बना चुकी हूं कि अब कुछ नया, अलग और खास ही मुझे वहां ले जा सकता है।

बुद्ध प्रतिमाओं के देश में मेरा बौद्ध मन!

अपने यहां राजगीर, सारनाथ, गया, कुशीनगर और लाहौल-स्पीति से लेकर जंस्कार-लद्दाख और यहां तक कि अरुणाचल, सिक्किम, भूटान तक में बौद्ध चिह्नों-पदचिह्नों पर मेरा मन मेरे तन के साथ कई-कई बार दौड़ लगा आया है। परम शांति की अद्भुत अनुभूतियों ने जिंदगी के लाजवाब अनुभव मुझे सौंपे हैं और बौद्ध भिक्षुओं-भिक्षुणियों के मैरून-पीले चोगे मुझे हमेशा से ललचाते रहे हैं। तो क्यों न इस बार एक ऐसे नए देश को चला जाए जहां बौद्ध दर्शन भी है, और बुद्ध की ऐसी-ऐसी प्रतिमाएं कि इंसानियत को धैर्य, सुकून, सब्र, शांति और अपने कर्तव्यमार्ग पर लगातार बढ़ते चले जाने का संदेश सुनाती हैं।

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Fasting Buddha

चियांग माइ में बुद्ध की दुर्लभ प्रतिमा है जो उन्हें उपवासमुद्रा में दिखाती है और नाखोन पाथोम में है स्टैंडिंग बुद्धा। लंबाई में शायद दुनिया में अपनी तरह का यह अनूठा मूर्तिशिल्प है। और परम लुभावनी ’रिक्लाइनिंग’ मुद्रा के लिए हमें वात हात याइ नाइ जाना होगा जहां विश्व के तीसरे सबसे बड़े रिक्लाइनिंग’ बुद्ध अपनी मनमोहिनी मुस्कुराहट के साथ विराजते हैं। 35 मीटर लंबी इस मूर्ति में बुद्ध की परिनिर्वाण की अवस्था को दिखलाया गया है और इसे देखने आए दर्शनार्थी इस मूर्ति के भीतर बुद्ध की छाती से होते हुए प्रवेश कर सकते हैं! बुद्ध के भीतर समा जाने का प्रतीक तो नहीं है यह प्रतिमा !

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Reclining Buddha

फिर हात बैंगराक, को समुई में भूमिस्पर्शमुद्रा में बैठे ध्यानमग्न बुद्ध पृथ्वी को साक्षी बनाते हुए दिखते हैं। उनका दायां हाथ घुटने पर टिका है और उंगलियां धरती की ओर इशारा करती हुई दिख रही है। इसी तरह, धर्मचक्रमुद्रा, ध्यानमुद्रा, वरमुद्रा अर्थात आशीष देती मुद्राओं में बुद्ध अपने विराट रूप में मौजूद हैं। वितर्कमुद्रा यानी उपदेश देते बुद्ध की प्रतिमा में अंगूठे और तर्जनी के जुड़ने से धर्मचक्र की मुद्रा को दर्शाया गया है।

थाइलैंड को देखने का यह अलग, अनुपम अंदाज़ होगा। थाइलैंड में बैठे हुए, ध्यानमग्न, खड़े हुए, धैर्य सिखाते, लेटे हुए, सौम्य-शांत बने रहने का संदेश देते, भोजन-पानी छोड़ने के बाद दुबले, सूखे, कृशकाय हो चुके बुद्ध की प्रतिमाएं हैं। और यहां तक कि चलते हुए बुद्ध भी हैं इस भूमि पर! बैठे, खड़े, सोए, जागे, लेटे, चलते हुए जाने कितनी ही मुद्राओं को समेटा हुआ है इन मूर्तिशिल्पों ने।

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Walking Buddha

कहते हैं बुद्ध जब जन्मे थे तो उनके शरीर पर 32 विशिष्ट चिह्न थे जैसे इतने लंबे हाथ जो बिना मोड़े घुटनों को छू सकते थे, सिंह समान जबड़ा और पैरों के तलवे पर चक्र। थाइ मूर्तिकारों ने अपने-अपने काल के हिसाब से इन चिह्नों की अभिव्यक्ति अपने शिल्पों में की है और उनका कला-बोध थाइलैंड के इतिहास की झलक दिखाता है। यानी थाइलैंड भूमि की सैर पर जाने का यह एक अलग नज़रिया है। बैंकॉक की मॉल-कल्चर की चकाचैंध से दूर, समुद्र-तटों पर रेसोर्ट टूरिज़्म से अलग, थाइ मसाज के लालच से ऊपर उठकर भी एक मंजिल है वहां … वहीं जाना है इस बार… एयर एशिया के साथ।

हमारी शादी की पच्चीसवीं सालगिरह का जश्न इस पूरे सालभर चलेगा, उसके साथ थाइलैंड आ रही हूं, उसकी फरमाइश पूरी होगी, यकीनन!

यह ब्लॉग एंट्री Dream Asian Destination Blogger  (http://www.airasia.com/in/en/promotion/online-travel-fair.page) प्रतियोगिता (http://www.ripplelinks.com/airasiabloggercontest/all_entries.html#.Uoexh8SnofU)  में मेरी भागीदारी है जिसे AirAsia और Ripple Links ने आयोजित किया है।

एयर एशिया से टिकट बुक करवाना आसान है, यहां मिलते हैं सस्ते टिकट। और बैंकॉक के सफर पर जाने के लिए तो एयर एशिया पर एयर टिकट सचमुच अविश्वसनीय हैं। इस बारे में और जानकारी लेना चाहें तो यहां (World’s BestOnline Travel Fair ) देखें।

Photo courtesy – Google (हालांकि इतना वायदा रहा कि थाइलैंड पर मेरी अगली पोस्ट में और भी एक्सक्लुसिव फोटो होंगी और सब मेरे डीएसएलआर से खींची गई होंगी।)

About Alka Kaushik

I am an Independent travel journalist, translator, blogger and inveterate traveller, based out of Delhi, India. I have been a food columnist for Dainik Tribune besides contributing or Dainik Bhaskar, ShubhYatra, Rail Bandhu, Jansatta, Dainik Jagran etc. My regular column on the portal The Better India - Hindi is a widely read and shared column with travel stories from around India.

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