spiritual Tourism – Pitrapaksh @Bodhgaya, Bihar

धार्मिक पर्यटन 

लो अब पिंडदान भी बन गया पर्यटन

पितृपक्ष पैकेज टूर 2012

समुद्र तटों की ओर अमीर सैलानी जाते हैं। पहाड़ों की सैर करते हैं। लेकिन अस्सी फीसदी ग्रामीण समुदाय वाले इस देश में धार्मिक भक्तिभावना और रीति रिवाज अपने आप में टूरिज्म का बड़ा हिस्सा है और गंगा अमरनाथ, बनारस, महाकाल, रथयात्राएं भारतवासियों को पुकारती रही हैं। ऐसे में जन्म-मृत्यु का विधान और हर व्यक्ति के जीवन की सच्चाई धार्मिक पर्यटन का हिस्सा क्यों न बने? अपने पुरखों को याद करते हुए अगर कोई पुण्य कमा रहा हो तो इस अनुष्‍ठान का अंग क्यों न बनाया जाए? बिहार की भूमि ने इस दिशा  में अनूठी पहल की है और देशभर में हिंदुओं के लिए परम तीर्थ नगरी मानी जाने वाली बोधगया नगरी में लोगों को पिंडदान के लिए आकर्षिक करने के लिए एक विशेष पैकेज पेश किया।

पिंडदान! और पैकेज!! सुनने में यह बात अजीब लगती है लेकिन पिंडदान के समय कोई आपको पंडों के चंगुल से बचा ले और आप मन की पवित्र भावना से अपने पुरखों का पुण्य स्मरण कर पाएं तो इससे अच्छा पैकेज और क्या हो सकता है।

बोध गया का पिंडदान मिथिकीय महत्व से जुड़ा है। बोधगया में भगवान श्रीराम ने अपने पिता दशरथ की आत्मा की शांति के लिए अनुष्‍ठान किया था और यह पावन भूमि आज भी हिंदुओं के लिए परम तीर्थ की तरह है। लोगों की अपार भीड़ को नियंत्रित करने और उनकी यात्रा को सुगम बनाने के मकसद से बिहार सरकार ने जो प्रयास अतीत में किए वे, अब एक पैकेज का रूप ले चुके हैं। सच तो यह है कि अब इस काम को बिहार टूरिज्म ने अपने वर्ष के कैलेंडर में बड़े कार्यक्रम के रूप में शामिल कर लिया है।  इस साल भी रविवार 30 सितंबर से सोमवार 15 अक्टूबर 2012 तक अश्विन माह के कृष्‍ण पक्ष के दौरान पितृपक्ष में पिंडदान की पूरी व्यवस्था को सुगम सरल और सहज बनाने के लिए रेडीमेड पैकेज घोषित किया गया है।

ऐसा माना जाता है कि हमारे मृत पूर्वज यमलोक से इसी पक्ष के दौरान धरती पर अपने-अपने घरों को आते हैं। पितृपक्ष (महालय पक्ष या श्राद्ध) में इन मृत आत्माओं की तृप्ति का विधान है। अगर आपके मन में भी अपने पूर्वजों की स्मृति में बोधगया में पिंडदान का अरमान बसा है तो इस पैकेज का लाभ उठाएं। आप अपनी सुविधा के हिसाब से एक दिन का पैकेज, ओवरनाइट पैकेज, 1 रात/2 दिन पैकेज, 2 रात/3 दिन पैकेज, इत्यादि में से चुन सकते हैं। आपको गया तक का सफर खुद करना है यानी गया तक रेल@हवाई मार्ग तक आने-जाने की व्यवस्था आपकी होगी लेकिन उसके बाद करीब 13 किलोमीटर दूर स्थित बोधगया तक आने-जाने होटल स्टे पिंडदान के लिए पंडे पूजा-अर्चना और सामग्री आदि की व्यवस्था इस पैकेज में शामिल है। आप अपनी श्रद्धानुसार बोधगया में एक ही दिन में पिंडदान कर लौट सकते हैं या चाहें तो एकाध दिन रुककर, पूर्वजों की स्मृति में कुछ समय बिताकर भी लौटा जा सकता है। गया रेलवे स्‍टेशन, हवाई अड्डे से आपको ए.सी.@नॉन-ए.सी. कार में लाने-ले जाने की बाकायदा व्यवस्था की गई है। फिर बोधगया में होटल में बजट, डीलक्स, सुपरडीलक्स स्टे का इंतजाम और पंडे तथा सामग्री और आसपास के दर्शनीय स्थलों तक घुमाने की व्यवस्था बिहार टूरिज्म ने अपने जिम्मे ली है।

पूरा ब्योरा बिहार टूरिज्‍म की वेबसाइट http://www.bstdc.bih.nic.in पर उपलब्ध है। पिंडदान के लिए बोधगया पहुंचने से कम-से-कम सात दिन पहले बुकिंग करा लें। पैकेज में रेल@हवाई यात्रा का खर्च शामिल नहीं है।

पटना से गया तक की दूरी करीब 92 किलोमीटर है और इन दोनों शहरों के बीच ट्रेन सफर करीब डेढ़ घंटे में किया जा सकता है। आप चाहें तो पटना से गया तक टैक्सी से भी आ-जा सकते हैं। पटना के लोकनायक जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर ही बिहार टूरिज्म के काउंटर से प्रीपेड टैक्सी ली जा सकती है।

कैसे पहुंचे गया – गया देश के प्रमुख शहरों से रेलमार्ग से जुड़ा है या पटना तक पहुंचकर यहां सड़कमार्ग से पहुंचा जा सकता है। दिल्ली से हर रोज महाबोधि एक्सप्रेस स्‍पेशल नॉन स्‍टॉप ट्रेन है जो कुल 15 घंटे 40 मिनट में गया तक का सफर पूरा करती है। इसके अलावा झारखंड एक्सप्रेस पुरूषोत्‍तम एक्सप्रेस सरीखी और भी कई रेलगाडि़यां गया तक आती-जाती हैं। (देखें – http://www.indianrail.gov.in)

पटना से गया तक की दूरी करीब 92 किलोमीटर है और इन दोनों शहरों के बीच ट्रेन सफर करीब डेढ़ घंटे में किया जा सकता है। आप चाहें तो पटना से गया तक टैक्सी से भी आ-जा सकते हैं। पटना के लोकनायक जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर ही बिहार टूरिज्म के काउंटर से प्रीपेड टैक्सी ली जा सकती है।

देश-विदेश के कई हवाईअड्डों (कोलंबो सिंगापुर बैंकाक वगैरह) से गया अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा सीधे जुड़ा है।

About Alka Kaushik

I am an Independent travel journalist, translator, blogger and inveterate traveller, based out of Delhi, India. I have been a food columnist for Dainik Tribune besides contributing or Dainik Bhaskar, ShubhYatra, Rail Bandhu, Jansatta, Dainik Jagran etc. My regular column on the portal The Better India - Hindi is a widely read and shared column with travel stories from around India.

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