Glimpses of nature & spirituality in Binsar

Love letters to God!

उत्‍तराखंड के अल्‍मोड़ा जिले में एक सोया-सा, खोया-सा गांव है बिनसर। हिमालय की त्रिशूल जैसी चोटियों का दीदार बिनसर घाटी से सहज ही हो जाता है, और जब आस्‍था को पंख लगते हैं तो नज़दीक ही (बिनसर अभयारण्‍य से करीब 4 किमी दूर) गोलू देवता के मंदिर में आप सीधे ईश्‍वर से संवाद कर सकते हैं।

सीधे हॉटलाइन जुड़ गई है ईश्‍वर से

जागेश्‍वर मंदिर समूह का ऐतिहासिक, पुरातात्विक और धार्मिक महत्‍व इन्‍हें विशिष्‍ट पहचान दिलाता है। बिनसर से करीब 54 किमी दूर, कद्दावर देवदार पेड़ों की गोद में वक्‍त से लोहा लेते इन मंदिरों में कुमाउंनी समाज की आस्‍था के साक्षात दर्शन होते हैं।

शिव भक्ति को समर्पित जागेश्‍वर मंदिर समूह
ऐतिहासिक महत्‍व के जागेश्‍वर मंदिर समूह में अब गिने-चुने मंदिर ही शेष हैं
जागेश्‍वर के मंदिरों की पृष्‍ठभूमि बुनते हैं देवदार के घने, लंबे वन
अल्‍मोड़ा (उत्‍तराखंड) के नज़दीक बिनसर अभयारण्‍य
प्रकृति से संवाद
नेचर वॉक
थोड़ा-सा रूमानी हो जाएं !
बिनसर अभयारण्‍य में कुहासे ने प्रकृति का सौंदर्य कई गुना बढ़ा दिया है
बिनसर पक्षी विहार में ‘जीरो प्‍वाइंट’ जहां से हिमालयी श्रृंखलाओं का अनुपम नज़ारा दिखता है
बिनसर में प्रकृति का साथ कभी नहीं छूटता
पहाड़ों में शाम का सुरूर वाकई कुछ अलग होता है, बिनसर में कुछ ऐसा होता है नज़ारा

About Alka Kaushik

I am an Independent travel journalist, translator, blogger and inveterate traveller, based out of Delhi, India. I have been a food columnist for Dainik Tribune besides contributing or Dainik Bhaskar, ShubhYatra, Rail Bandhu, Jansatta, Dainik Jagran etc. My regular column on the portal The Better India - Hindi is a widely read and shared column with travel stories from around India.

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